बच्चों के मन में कभी भी पराजय की भावना नहीं आनी चाहिये

By StateNewsAdmin - Sat Aug 11, 4:12 am

राँची, 22 जुलार्इ, 2012

बच्चों पर बोले महामहिम  !क्रानित कान्तjharkhand childमहामहिम राज्यपाल डा0 सैयद अहमद ने कहा है कि बच्चों के मन में कभी भी पराजय की भावना नहीं आनी चाहिये, उन्हें अपने मंजिल को हासिल करने हेतु प्रयासरत रहना चाहिये, कामयाबी निषिचतरूपेण उन्हें मिलेगी। उन्होंने कहा कि बच्चे दिल से मेहनत करें, वे जिस किसी भी विषय का चयन करें, उसमें उत्कृष्टता हासिल करे। महामहिम राज्यपाल उक्त विचार आज होटल रेडिषन ब्लू, राँची में दैनिक समाचारपत्र प्रभात खबर द्वारा आयोजित कार्यक्रम ”प्रतिभा सम्मान समारोह के अवसर पर व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर आरक्षी महानिदेषक श्री जी0एस0 रथ, महामहिम राज्यपाल के प्रधान सचिव श्री आदित्य स्वरूप, आर्इ0आर्इ0एम0, राँची के निदेषक श्री एम0जे0 जेवियर, प्रभात खबर के प्रधान संपादक श्री हरिवंष सहित कर्इ गणमान्य व्यकित एवं बच्चे व अभिभावक उपसिथत थे।महामहिम राज्यपाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी सम्पदा उस देष के युवा होते हैं, जो देष का गौरव बनते हंै। देष का इतिहास, देष की परम्परा, देष की संस्कृति, देष की भाषा, देष की सच्चार्इ आदि सब कुछ उन्हीं पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि आज समाज में बहुत सी कुरीतियाँ हैं, जिनका निदान षिक्षा से ही संभव है। षिक्षित व्यकित ही सामाजिक असमानता को अच्छी तरह समझ सकते हैं और इसका निदान कर सकता है। षिक्षा ही है, जो मनुष्य के आत्मविष्वास को बढ़ाता है और उनके क्षमताओं में वृद्धि लाने का कार्य करता है।

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इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल ने कहा कि हमारे बहुत से बच्चों को परीक्षाओं से भय लगता है, उन्हें लगता है कि वे रणक्षेत्र व जंग के मैदान में जा रहे हैं, अत: उन्हें घबराना नहीं चहिये, इस जंग के मैदान को आसानी से वे परिश्रम व धैर्य के बदौलत जीत सकते हैं। एक बादषाह का उदाहरण देते हुए महामहिम राज्यपाल ने परीक्षाओं में असफल व बेहतर न करनेवाले बच्चों से कहा वे मायूसी का षिकार न हों, बलिक वे धैर्य रखें और मेहनत करें, सफलता यकीनन उन्हें प्राप्त होंगी। महामहिम ने सम्मान पानेवाले बच्चों से कहा कि यह परीक्षा आपकी जिंदगी की अनितम परीक्षा नहीं है, आगे आनेवाली जीवन के हर दिन, हर क्षण एक परीक्षा होती रहेगी। अत: आप र्इमानदारी से, समर्पण की भावना से आगे और मेहनत करें और अपने कार्यों से राष्ट्र की सेवा करें। उन्होंने सम्मान पानेवाले बच्चों के अभिभावकों एवं षिक्षकों को बधार्इ दी, जिन्होंने बच्चों के पीछे मेहनत की, उनका हौसला अफजायी और उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की सीख दी। महामहिम राज्यपाल ने लड़के और लड़कियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पद्र्धा पर खुषी जताते हुए कहा कि बिना लड़कियों के विकास के देष का अपेक्षित विकास संभव नहीं है।महामहिम राज्यपाल ने इस अवसर पर समाचारपत्रोंमीडिया द्वारा बच्चों के मनोबल व आत्मविष्वास में वृद्धि लाने के उद्देष्य से इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि आज विभिन्न माध्यमों यथा- समाचारपत्र, इ0 चैनल आदि से ज्ञात होता है कि किसी बच्चे ने झाड़ू-पोछा कर मैटि्रकइंटर अच्छे अंकों के साथ उŸाीर्ण किया, उसमें आगे पढ़ने की ललक है।

अत: इस ओर हम सभी को सामाजिक उŸारदायित्व की भावना का पालन करते हुए ध्यान देना चाहिए और एक अच्छे नागरिक का परिचय देना चाहिए।इस अवसर पर आरक्षी महानिदेषक श्री जी0एस0 रथ ने कहा कि सभी बच्चे एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर उसी दिषा में आगे बढ़ें, तो सफलता उन्हें अवष्य प्राप्त होंगी। उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों को उसकी पसंद के अनुकूल विषय ही पढ़ायें। समारोह को संबोधित करते हुए महामहिम राज्यपाल के प्रधान सचिव श्री आदित्य स्वरूप ने कहा कि बच्चों के उपर ही देष का भविष्य निर्भर है। उन्होंने कहा कि षिक्षा सिर्फ परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने तक ही सीमित नहीं है, बलिक अपने अंदर छिपी हुर्इ नैसर्गिक प्रतिभा को निखारना भी है। इस अवसर पर प्रभात खबर के प्रधान संपादक श्री हरिवंष ने कार्यक्रम के उद्देष्यों पर प्रकाष डालते हुए कहा कि प्रभात खबर का सदैव प्रयास रहा है बच्चों के मनोबल में वृद्धि लाने हेतु उनके प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया जाय। उन्होंने कहा कि यदि हमें अपने देष की तकदीर को संवारना है तो बच्चों के विकास पर ध्यान देना होगा। अन्य अतिथियों ने भी समारोह को संबोधित किया। महामहिम राज्यपाल ने इस अवसर पर अच्छे प्रदर्षन करनेवाले विधालय के प्राचार्यों एवं बच्चों को सम्मानित किया।
फोटो संलग्न है।खेल से व्यतितत्व का विकास होता है

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